Aligar/UP/India:संकाय द्वारा “ स्कूल पाठ्यक्रम ” विषय पर आयोजित सेमिनार में दिया। सेमीनार का शुभारम्भ डाॅ गिर्राज किशोर व प्राचार्या डाॅ स्वर्णलता याज्ञनिक, बीएड प्रभारी प्रो विवके सारस्वत ने दीप प्रज्जवलित कर किया। प्राचार्या डाॅ स्वर्णलता याज्ञनिक ने मुख्य वक्ता डाॅ गिर्राज किशोर का परिचय दिया।
सेमिनार में रेनू यादव, ज्योति सारस्वत, राधा, निधि गुप्ता, क्षमा चैधरी, तरूना, उमा भारती, नेहा सिंह, राजुल सहित एक दर्जन से अधिक छात्राओं ने “ स्कूल पाठ्यक्रम ” विषय पर पेपर प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता डाॅ गिर्राज किशोर ने उद्बोधन में कहा कि “ जिज्ञासा, शिक्षण की वह धुरी है जिसके चारों ओर शिक्षक और शिक्षार्थी शिक्षा के प्रति अग्रसरित रहतेे हैं। बच्चे को प्रश्न करने का जन्मसिद्ध अधिकार है, तो शिक्षक का जबाब देना, उसका जन्मसिद्ध कर्तव्य है। ” विषय पर छात्राओं ने अपनी जिज्ञासाओं को मुख्य वक्ता के सामने रखा। मुख्य वक्ता ने विस्तार से उनके सवालों के जबाब देकर जिज्ञासाओं को शांत किया। प्राचार्या डाॅ स्वर्णलता याज्ञनिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन प्रो विवके सारस्वत ने किया। इस दौरान नीरज सिंह, सीमा शर्मा, रोजी, परिधि मिश्रा, चमन शर्मा ने भी विचार रखे।
सेमिनार में रेनू यादव, ज्योति सारस्वत, राधा, निधि गुप्ता, क्षमा चैधरी, तरूना, उमा भारती, नेहा सिंह, राजुल सहित एक दर्जन से अधिक छात्राओं ने “ स्कूल पाठ्यक्रम ” विषय पर पेपर प्रस्तुत किए। मुख्य वक्ता डाॅ गिर्राज किशोर ने उद्बोधन में कहा कि “ जिज्ञासा, शिक्षण की वह धुरी है जिसके चारों ओर शिक्षक और शिक्षार्थी शिक्षा के प्रति अग्रसरित रहतेे हैं। बच्चे को प्रश्न करने का जन्मसिद्ध अधिकार है, तो शिक्षक का जबाब देना, उसका जन्मसिद्ध कर्तव्य है। ” विषय पर छात्राओं ने अपनी जिज्ञासाओं को मुख्य वक्ता के सामने रखा। मुख्य वक्ता ने विस्तार से उनके सवालों के जबाब देकर जिज्ञासाओं को शांत किया। प्राचार्या डाॅ स्वर्णलता याज्ञनिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन प्रो विवके सारस्वत ने किया। इस दौरान नीरज सिंह, सीमा शर्मा, रोजी, परिधि मिश्रा, चमन शर्मा ने भी विचार रखे।

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